शाहजहाँपुर/बरेली। उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि इंसानियत को भी झकझोर दिया है। लूट और बर्बर हमले का शिकार हुए युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई—लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ित का खुद का वीडियो बयान मौजूद होने के बावजूद पुलिस अब तक कार्रवाई से दूर है।
मृतक देशराज मौर्य
बरेली के फतेहगंज पूर्वी थाना क्षेत्र की लेखपाल कॉलोनी निवासी विनीता कुमारी मौर्य ने बताया कि उनके पति देशराज मौर्य 4 फरवरी 2026 को शाहजहाँपुर के ग्राम वमनी नगला गए थे। उनके साथ पड़ोसी आयुष ठाकुर उर्फ सनी ठाकुर भी मौजूद था—जिस पर अब सबसे बड़ा आरोप है।
परिवार के अनुसार, उसी शाम करीब 6:30 बजे थाना जैतीपुर क्षेत्र के मरूआ झाला के पास आयुष और उसके साथियों ने मिलकर देशराज पर हमला कर दिया। बेरहमी से पिटाई के बाद करीब 1 लाख रुपये नकद, सोने की चेन और अंगूठी लूट ली गई।
आरोप है कि हमलावरों ने पूरी घटना को दुर्घटना दिखाने की साजिश रची। गंभीर हालत में देशराज को बरेली के ओमेगा अस्पताल में भर्ती कराकर आरोपी फरार हो गए—परिवार को सूचना तक नहीं दी गई। बाद में एक अज्ञात कॉल से इस घटना की जानकारी परिजनों तक पहुंची।
ओमेगा अस्पताल से लेकर सिद्धि विनायक अस्पताल तक लंबा इलाज चला, लेकिन जिंदगी की जंग देशराज हार गए।
7 अप्रैल को शाम करीब 4 बजे उनकी मौत हो गई।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और दर्दनाक पहलू यह है कि देशराज मौर्य का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह खुद अपने ऊपर हुए हमले और लूट की पूरी कहानी बता रहे हैं।
इसके बावजूद—पुलिस की चुप्पी सवालों के घेरे में है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने आरोपियों के परिवार से बात की तो उन्हें गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी गईं।
थाना जैतीपुर से लेकर एसपी शाहजहाँपुर तक गुहार लगाई गई, लेकिन कार्रवाई शून्य रही।
सबसे गंभीर स्थिति अब यह है कि देशराज मौर्य का शव घर पर रखा हुआ है—और परिवार न्याय की मांग पर अड़ा हुआ है।
कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, न ही पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाई।
परिवार का साफ कहना है कि अगर न्याय नहीं मिला तो वे जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करेंगे।
यह मामला अब सिर्फ एक हत्या या लूट का नहीं रहा—
यह सवाल बन गया है कि अगर पीड़ित का खुद का बयान, वीडियो सबूत और लिखित शिकायत भी कार्रवाई नहीं करा पा रही, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे?
जिस तरह से परिवार लाश के साथ घर पर बैठा है और प्रशासन पूरी तरह गायब दिख रहा है—स्थिति कभी भी विस्फोटक हो सकती है। स्थानीय स्तर पर आक्रोश बढ़ रहा है और अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला प्रदेशभर में बड़ा मुद्दा बन सकता है।