बरेली में महिला की मौत के बाद बालाजी अस्पताल का पलटवार, शिकायतकर्ता पर गंभीर आरोप
बरेली। बरेली के श्री बालाजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद महिला की मौत के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। मृतका श्यामा देवी के बेटे रोहित कुमार ने अस्पताल पर इलाज में लापरवाही, ऑपरेशन के बाद हालत बिगड़ने और इलाज से संबंधित कागजात उपलब्ध न कराने सहित 60 हजार रुपये मांगने के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, इन आरोपों के बाद अब बालाजी अस्पताल के संचालक डॉ. पारस कुमार गुप्ता ने पलटवार करते हुए पुलिस को शिकायत दी है। अस्पताल की ओर से शिकायतकर्ता पक्ष पर अस्पताल में आकर विवाद करने, 20 लाख रुपये में समझौते की बात करने और हमला करने का प्रयास करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

श्यामा देवी को 10 अगस्त 2026 को श्री बालाजी अस्पताल, बाईपास रोड, बरेली में भर्ती कराया गया था। परिवार के मुताबिक, 11 अगस्त को आयुष्मान कार्ड के माध्यम से उनका ऑपरेशन किया गया। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के करीब सात घंटे बाद भी उन्हें होश नहीं आया और उनकी हालत बिगड़ती चली गई। इसके बाद उन्हें ग्लोबल अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान 12 अगस्त 2026 को उनकी मौत हो गई।
मृतका के बेटे रोहित कुमार का आरोप है कि उनकी मां की हालत ऑपरेशन से पहले ठीक थी, लेकिन ऑपरेशन के बाद स्थिति गंभीर हो गई। उनका यह भी आरोप है कि जब उन्होंने बालाजी अस्पताल से इलाज से संबंधित कागजात मांगे तो उन्हें कथित तौर पर धमकाया गया और 60 हजार रुपये की मांग की गई। इन्हीं आरोपों को लेकर परिवार ने पहले जिलाधिकारी से शिकायत की और बाद में मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
इस दौरान मृतका के पति भी CMO कार्यालय पहुंचे। परिवार के मुताबिक, वह पिछले करीब 10 वर्षों से पैरालिसिस से पीड़ित हैं और श्यामा देवी ही इतने वर्षों से उनकी देखभाल कर रही थीं। पत्नी की मौत के बाद वह बेहद भावुक नजर आए। इंडस न्यूज़ टीवी से बातचीत के दौरान मृतका के पति अपनी पत्नी को याद कर रो पड़े और अपना दर्द बयां किया। परिवार का कहना है कि उन्हें अपनी पत्नी और मां की मौत का जवाब चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग ने गठित की जांच कमेटी
मामले को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विश्राम सिंह और नोडल अधिकारी डॉ. लईक अहमद अंसारी से इंडस न्यूज़ टीवी ने बातचीत की। अधिकारियों ने बताया कि मामले में जांच कमेटी गठित कर दी गई है। उनका कहना है कि कमेटी पूरे मामले की जांच करेगी और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
बालाजी अस्पताल ने क्या कहा?
मामले को लेकर इंडस न्यूज़ टीवी ने बालाजी अस्पताल के संचालक डॉ. पारस कुमार गुप्ता से भी बात की। डॉ. पारस कुमार ने बताया कि श्यामा देवी का ऑपरेशन उनके अस्पताल में ही हुआ था, लेकिन ऑपरेशन के समय किसी तरह की जटिलता नहीं हुई थी।
डॉ. पारस कुमार के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद जब महिला की स्थिति नाजुक हुई तो उन्हें बेहतर इलाज के लिए ग्लोबल अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनकी मौत हुई। उनका कहना है कि महिला की मौत बालाजी अस्पताल में नहीं, बल्कि ग्लोबल अस्पताल में हुई।
जब उनसे परिवार के इस आरोप के बारे में पूछा गया कि अस्पताल ने इलाज से संबंधित कागजात उपलब्ध नहीं कराए, तो डॉ. पारस कुमार ने कहा कि महिला का ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत हुआ था और उनका दावा है कि इस योजना के तहत इलाज के कागजात परिवार को नहीं दिए जाते।
अब अस्पताल की ओर से शिकायतकर्ता पर पलटवार
मामले में अब बालाजी अस्पताल की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत ने विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। 27 अगस्त 2026 को दी गई शिकायत में अस्पताल संचालक डॉ. पारस कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया है कि अरविंद नाम का व्यक्ति अस्पताल और उच्च अधिकारियों को 20 लाख रुपये की कथित अवैध मांग पूरी कराने के लिए लगातार शिकायतें और दबाव बना रहा है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 24 अगस्त 2026 को दोपहर करीब दो बजे अरविंद, रोहित और चार अज्ञात लोग अस्पताल पहुंचे। अस्पताल संचालक का आरोप है कि उनके पास कथित तौर पर हथियार, असलहा और लाठी-डंडे थे तथा उन्होंने अस्पताल में हमला करने का प्रयास किया। शिकायत के मुताबिक, अस्पताल के स्टाफ और CCTV कैमरे मौजूद होने के कारण उनका प्रयास सफल नहीं हुआ।
अस्पताल संचालक ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित तौर पर 20 लाख रुपये की मांग पूरी न करने पर जान से मारने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। शिकायत में संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।
20 लाख रुपये के समझौते का वीडियो भी सामने आया
बालाजी अस्पताल के संचालक डॉ. पारस कुमार की ओर से एक वीडियो भी उपलब्ध कराया गया है, जिसमें अरविंद नाम का व्यक्ति कथित तौर पर 20 लाख रुपये में समझौता होने की बात कहता हुआ सुनाई दे रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने इस वीडियो को अपने आरोपों के समर्थन में उपलब्ध कराया है।
हालांकि, केवल इस वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि यह रकम वसूली या रंगदारी के उद्देश्य से मांगी गई थी। वीडियो का पूरा संदर्भ, उसकी प्रामाणिकता और बातचीत की परिस्थितियां जांच का विषय हैं। प्रथम दृष्टया बातचीत में 20 लाख रुपये में समझौते की बात सामने आती है, लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य और परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।
मेडिकल जांच सबसे महत्वपूर्ण
फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से गंभीर आरोप-प्रत्यारोप सामने आ चुके हैं। लेकिन श्यामा देवी की मौत और कथित मेडिकल लापरवाही के मूल मामले में इन आरोपों का सीधा संबंध नहीं है।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि बालाजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान और उसके बाद मरीज की वास्तविक मेडिकल स्थिति क्या थी, ऑपरेशन किस डॉक्टर ने किया, ऑपरेशन नोट और केस शीट में क्या दर्ज है, मरीज की हालत बिगड़ने का कारण क्या था, उसे ग्लोबल अस्पताल क्यों रेफर किया गया और रेफर किए जाने के समय उसकी मेडिकल स्थिति क्या थी।
इसीलिए अब स्वास्थ्य विभाग की जांच कमेटी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। मेडिकल रिकॉर्ड, ऑपरेशन नोट, उपचार की प्रक्रिया, ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर की भूमिका और दोनों अस्पतालों के रिकॉर्ड की विशेषज्ञ जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत के पीछे किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही थी या नहीं।
वहीं, अस्पताल की ओर से लगाए गए 20 लाख रुपये की मांग, हमला और धमकी जैसे आरोप अलग विषय हैं। इनकी सत्यता पुलिस जांच में स्पष्ट होनी है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच इस मामले की निष्पक्ष मेडिकल जांच ही सबसे अहम है, क्योंकि इसी से श्यामा देवी की मौत से जुड़े वास्तविक तथ्य सामने आ सकेंगे।